इस वर्ष पुरुषोत्तम मास में मंगलवार के दिन हस्त नक्षत्र युक्त दशमी तिथि है। हस्त नक्षत्र युक्त दशमी के दिन ही गंगा दशहरा का सबसे विशिष्ट महत्व है। इस दिव्य योग में भगवती भागीरथी गंगा जी में स्नान करने से दश प्रकार के पापों का नाश होता है। साधकों को इस दिन गंगा जी में स्नान कर नाभि पर्यंत जल में खड़े होकर अपने इष्ट मंत्र/कवच का 108 की संख्या में अवश्य जप करना चाहिए।
26 मई मंगलवार को भोर 3 बजे से स्नान जप आदि आरंभ कर दें। गंगा घाट पर श्री शिव सहस्त्रनाम श्री गंगा शतनाम आदि का पाठ करना भी अति उत्तम व दिव्य प्रभाव देने वाला होता है।
अगर गंगा घाट ना जा पायें तो पास के जो भी दिव्य नदी सरोवर समुद्र हो वहां स्नान करें।
अगर घर पर ही रहना हो तो सूर्योदय पूर्व स्नान करके शिवलिंग का विभिन्न पदार्थों से अभिषेक पूजन करें। गंगाशतनाम से अर्चन शिव जी/ शिवलिंग पर पीले पुष्प से करें।
इस दिन दशहरी आम का दान करना, गंगा जी को आम अर्पित करना दस की संख्या में एक दिव्य कर्म काशी क्षेत्र में माना गया है जिससे दस प्रकार के श्रेष्ठ फलों की प्राप्ति होती है।
गृहस्थ तंत्र परिवार के द्वारा हस्त नक्षत्र युक्त दशमी तिथि को इस बार विशेष दिव्य अनुष्ठान होगा। प्रथम भगवती गंगा जी में दत्तात्रेय व गणपति महातर्पण, भगवती गंगा का वृहद पूजन, उनको पंच श्रृंगार अर्पण, श्री गंगा सहस्रनाम से अर्चन, श्री शिव सहस्त्रनाम से अर्चन, भगवती अन्नपूर्णा के मंत्रों द्वारा भगवती गंगा जी में रहने वाले जीवों को अन्न समर्पण, श्री गंगा भैरव का तथा साठ हजार रक्षकों सहित योगिनी मातृकाओं के जी भगवती गंगा के रक्षण में स्थित रहतीं हैं उनके निमित्त बलि व पूजन रात्रि काल में विशेष।
वृहद तंत्रोक्त हवन आदि।
इस बार चुंकी गंगा दशहरा व बटुक भैरव जयंती अलग अलग है साथ ही पुरूषोत्तम माह का गंगा दशहरा अत्यंत दुर्लभ है इसलिए इस बार वृहद अनुष्ठान का अवसर प्राप्त हुआ है गंगा भैरव व भगवती भागीरथी का।
अनुष्ठान उपरांत प्रसाद आपको भेजा जायेगा।

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