अधिकमास ज्येष्ठ में अमावस्या सोमवार के दिन है जो की अपने आप में महासिद्ध तंत्र काल है।
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या, रविवार को पड़ने वाली सप्तमी, मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी तथा बुधवार को पड़ने वाली अष्टमी— इन विशेष संयोगों में जो पाप अथवा पुण्य किया जाता है, वह साठ हजार जन्मों तक प्रत्येक जन्म में अक्षय (अविनाशी फल देने वाला) रहता है।
सोमवारेऽप्यमावास्या #आदित्याहे_तु_सप्तमी ।
चतुर्थङ्गारवारे च बुधवारे च अष्टमी ॥
अत्र यत् क्रियते पापमथवा धर्म्मसञ्चयः ।
षष्टिजन्मसहस्राणि प्रतिजन्म तदक्षयं॥– तिथ्यादितत्त्वम्
अमावास्या तु सोमेन #सप्तमी_भानुना_सह।
चतुर्थी भूमिपुत्रेण सोमपुत्रेण चाष्टमी।। चतस्रस्तिथयस्त्वेताः सूर्यग्रहणसन्निभाः।
स्नानं दानं तथा श्राद्धं सर्वतश्चाक्षयं भवेत्।।- शङ्खस्मृति
उपरोक्त महात्म्य को ध्यान में रखकर आगामी सोमवती अमावस्या को सभी साधक साधिका, सूर्योदय पूर्व स्नान, नित्य संध्या उपरांत एकदिवसीय लघु अनुष्ठान, सहित हवन आदि अवश्य करें , साथ ही इस दिन अपने आराध्य के गीता का पाठ करें तो कई गुणा लाभ हो, पंचबलि अथवा गौमाता को अन्न सेवा अवश्य ही करना है इस दिन।
गृहस्थ तंत्र परिवार के ओर से इस दिन दुर्गामास की पूर्णता को ध्यान में रखकर कालिका संपुट नवचंडी, श्री बटुक भैरव लघु याग अनुष्ठान आयोजित होगा, संग मालपुआ दान जिसका विशेष महात्म्य है अधिकमास में वह भी किया जायेगा। तंत्रोक्त हवन आदि सभी कुछ संपूर्ण होगा।
लंबे समय से चले आ रहे कष्टों से मुक्ति, जीवन पर्यंत सुख प्राप्ति व दरिद्रता का नाश, ऋण से हैं तो उससे मुक्ति, शत्रु व कलह का नाश, इस दिन आपके स्वयं के अनुष्ठान करने व करवाने से नष्ट होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
अनुष्ठान उपरांत प्रसाद आपको शीघ्र ही भेजा जायेगा।

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