GRIHASTH TANTRA

अति उग्र हवनात्मक अनुष्ठानम्

501.00

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की महारात्रि का महत्व केवल कृष्ण भक्तों के लिए ही नहीं वरन शैव और शाक्तों के लिए भी अत्यंत वृहद है।
इस रात्रि को मोहरात्रि कहा गया है। इस मध्य रात्रि में ब्रह्मांड की अति गुप्त अति गुप्त महाशक्ति प्रकट हुईं जिन्हें गुह्यकाली के नाम से जानते हैं। काली कुल की ऐसी शक्ति जो सबसे तीक्ष्ण व शीघ्र अपने साधक को प्रतिउत्तर देतीं हैं। जिनके साधक भगवान श्रीराम सहित भरत जी लक्ष्मण जी , रावण तक हुये। श्री हनुमान जी जिनके सिद्धी के निमित्त भगवान सुर्य नारायण से विशिष्ट दीक्षा कौल कुलाचार में प्राप्त कियें। इनके साथ ही यह तिथि भगवान भैरव जी को समर्पित है ही।
तंत्र साधकों के लिए यह रात्रि अत्यंत विशेष है तथा इस रात्रि जागकर जो भी मंत्र जप हवन आदि किया जाये वह तत्क्षण जाग्रत होता है। इस पर्व के व्रत को करने से 1000 एकादशी व्रत का फल प्राप्त होता है‌। भगवती गुह्यकाली, श्री काल भैरव सहित भगवान श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं।

उग्र हवन तंत्र अभिचार नाश हेतु उग्र हवन में शमशान भैरव महाभैरव व भगवती शमशान कालिका के विधानों का प्रयोग होगा‌।
इस अनुष्ठान का कोई प्रसाद आदि नहीं जायेगा।

 

नमश्चण्डिकायै ❤️

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की महारात्रि का महत्व केवल कृष्ण भक्तों के लिए ही नहीं वरन शैव और शाक्तों के लिए भी अत्यंत वृहद है।
इस रात्रि को मोहरात्रि कहा गया है। इस मध्य रात्रि में ब्रह्मांड की अति गुप्त अति गुप्त महाशक्ति प्रकट हुईं जिन्हें गुह्यकाली के नाम से जानते हैं। काली कुल की ऐसी शक्ति जो सबसे तीक्ष्ण व शीघ्र अपने साधक को प्रतिउत्तर देतीं हैं। जिनके साधक भगवान श्रीराम सहित भरत जी लक्ष्मण जी , रावण तक हुये। श्री हनुमान जी जिनके सिद्धी के निमित्त भगवान सुर्य नारायण से विशिष्ट दीक्षा कौल कुलाचार में प्राप्त कियें। इनके साथ ही यह तिथि भगवान भैरव जी को समर्पित है ही।
तंत्र साधकों के लिए यह रात्रि अत्यंत विशेष है तथा इस रात्रि जागकर जो भी मंत्र जप हवन आदि किया जाये वह तत्क्षण जाग्रत होता है। इस पर्व के व्रत को करने से 1000 एकादशी व्रत का फल प्राप्त होता है‌। भगवती गुह्यकाली, श्री काल भैरव सहित भगवान श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं।

उग्र हवन तंत्र अभिचार नाश हेतु उग्र हवन में शमशान भैरव महाभैरव व भगवती शमशान कालिका के विधानों का प्रयोग होगा‌।
इस अनुष्ठान का कोई प्रसाद आदि नहीं जायेगा।

 

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